एफएसडीए निरीक्षण में टुंडे कबाबी के प्रबंधकों और मालिकों ने "160 मसालों" के वर्तमान प्रयोग से किया इंकार, दशकों पुराने दावे निकले झूंठ l
लखनऊ/01 जुलाई 2026.......... दशकों से टुंडे कबाबी की पहचान मोहम्मद उस्मान एंड संस की 160 गुप्त मसालों वाली रेसिपी के रूप में प्रचारित होती रही है। किंतु खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए), लखनऊ द्वारा विभिन्न शाखाओं में किए गए आधिकारिक निरीक्षण में दर्ज तथ्यों ने इस दावे के वर्तमान स्वरूप पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
उर्वशी शर्मा की शिकायत पर एफएसडीए अधिकारियों ने टुंडे कबाबी की विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टुंडे टावर्स, अलीगंज शाखा के प्रबंधक ने अधिकारियों को बताया कि उनके प्रतिष्ठान में 160 मसालों के मिश्रण का प्रयोग नहीं किया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके मेन्यू अथवा प्रचार सामग्री में ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है। अधिकारियों ने निरीक्षण रिपोर्ट में उल्लेख किया कि मेन्यू एवं प्रदर्शित सामग्री में केवल प्रतिष्ठान के इतिहास (Legacy/History) का उल्लेख है।
जांच के दौरान प्रबंधक ने यह भी स्वीकार किया कि मिश्रित मसाले की रेसिपी अथवा संरचना के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है तथा मिश्रित मसाला अमीनाबाद स्थित स्वामी द्वारा उपलब्ध कराया जाता है।
इसी प्रकार एम.आर. ईटिंग पॉइंट (टुंडे कबाबी), सेकेंड फ्लोर, लुलु शॉपिंग मॉल के निरीक्षण में अधिकारियों को "160 मसालों" का कोई लिखित दावा, बोर्ड अथवा विज्ञापन नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार परिसर में प्रदर्शित विजन/मिशन बोर्ड पर केवल प्रतिष्ठान की ऐतिहासिक विरासत एवं मसालों के मिश्रण का सामान्य उल्लेख था, जिसे अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत नहीं माना। यहां के प्रबंधक ने भी बताया कि मिश्रित मसाला अमीनाबाद शाखा के स्वामी द्वारा उपलब्ध कराया जाता है।
घंटाघर स्थित शाखा के प्रबंधक ने भी अधिकारियों को बताया कि उन्होंने कभी 160 मसालों के प्रयोग का दावा नहीं किया तथा उनके मेन्यू कार्ड में भी ऐसा कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि तैयार खाद्य सामग्री अमीनाबाद से उपलब्ध कराई जाती है।
हुसैनाबाद स्थित शाखा में भी प्रबंधक ने अधिकारियों को बताया कि कबाब एवं अन्य खाद्य पदार्थ अमीनाबाद से आते हैं तथा उन्हें किसी 160 मसालों के मिश्रण की जानकारी नहीं है। यहां भी मेन्यू कार्ड में ऐसा कोई दावा नहीं पाया गया।
सबसे महत्वपूर्ण निरीक्षण 168/8, ओल्ड नज़ीराबाद, अमीनाबाद स्थित मूल प्रतिष्ठान में हुआ। निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार परिसर में 160 प्रकार के मसालों के प्रयोग संबंधी कोई बोर्ड, पोस्टर अथवा प्रचार सामग्री प्रदर्शित नहीं मिली। पूछताछ पर खाद्य कारोबारकर्ता ने 160 प्रकार के मसालों के प्रयोग संबंधी दावे को असत्य बताया तथा अधिकारियों को अवगत कराया कि उनके प्रतिष्ठान में केवल पैकेटबंद एवं कंपनी द्वारा निर्मित मसालों का ही प्रयोग किया जाता है।
सरकारी निरीक्षण के इन अभिलेखों के बाद अब यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि विभिन्न शाखाओं के प्रबंधक तथा स्वयं अमीनाबाद स्थित खाद्य कारोबारकर्ता वर्तमान में 160 मसालों के प्रयोग से इंकार कर रहे हैं, तो वर्षों से "मोहम्मद उस्मान एंड संस की 160 गुप्त मसालों वाली रेसिपी" के नाम पर बनी ब्रांड पहचान का वास्तविक आधार क्या है। प्रश्न यह भी है कि क्या मोहम्मद उसमान एंड संस व्यापार में लाभ के लिए दशकों से मीडिया के माध्यम से 160 गुप्त मसालों की रेसिपी का झूंठ दुनिया के सामने परोस अपने ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे?
उपभोक्ताओं के समक्ष प्रस्तुत ब्रांड छवि और वास्तविक संचालन में पाया गया यह अंतर केवल खाद्य गुणवत्ता तक सीमित न रहकर मोहम्मद उसमान एंड संस के टुंडे कबाबी द्वारा भ्रामक व्यापारिक दावों एवं उपभोक्ता संरक्षण के मुद्दों के साथ-साथ आम जनता के साथ धोखाधड़ी करने के आपराधिक कृत्य करने का गंभीर प्रश्न भी खड़े कर रहा है।
उर्वशी ने बताया कि वे शीघ्र ही जनहित के इन मामलों को लेकर अदालत जाएँगी ताकि झूंठ का व्यापार करने वालों पर लगाम लगे और आम ग्राहक के हित सुरक्षित रहें l



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