गीता गांधी किंगडन के CMS की 13 शाखाएं और हेड ऑफिस अग्नि जोखिम में, 5 में से 4 कैम्ब्रिज कैंपस अग्नि सुरक्षा मानकों में विफल
लखनऊ के CMS कैंपसों में अग्नि सुरक्षा पर गंभीर सवाल, IGRS कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा ने बजाया अलार्म, एक और अलीगंज जैसी त्रासदी से पहले जवाबदेही की मांग
लखनऊ के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल, IGRS शिकायतों से सामने आई अग्नि सुरक्षा अनुपालन की चिंताजनक तस्वीर
लखनऊ, उत्तर प्रदेश. 24.08.2026
भारत के प्रमुख निजी विद्यालय समूहों में शामिल और विश्व में सर्वाधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालय के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल कर चुके सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, CMS, की कई शाखाओं में अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सामाजिक, RTI और IGRS कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा द्वारा की गई शिकायतों के बाद सामने आई निरीक्षण रिपोर्टों ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है.
शर्मा की शिकायतों पर हुई जांच के अनुसार CMS की कुल 13 शाखाओं और हेड ऑफिस में गंभीर अग्नि सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आई हैं. इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि CMS के कैम्ब्रिज इंटरनेशनल एजुकेशन कार्यक्रम के 5 में से 4 कैंपसों में अनिवार्य अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन में गंभीर कमियां पाई गईं हैं.
आग के खतरे वाले CMS कैम्ब्रिज कैंपस
1. गोल्फ सिटी कैंपस.
2. गोमती नगर 1 कैंपस.
3. गोमती नगर एक्सटेंशन, वरदान खंड कैंपस.
4. राजाजीपुरम 1 कैंपस.
आग के खतरे वाले अन्य CMS कैंपस
1. अलीगंज कैंपस.
2. अशर्फाबाद कैंपस.
3. चौक कैंपस.
4. इंदिरानगर कैंपस.
5. जानकीपुरम कुर्सी रोड कैंपस.
6. राजेंद्र नगर कैंपस.
7. स्टेशन रोड कैंपस.
8. अयोध्या रोड कैंपस.
9. शालीमार वनवर्ल्ड कैंपस.
10. नवनिर्मित हेड ऑफिस.
इन खुलासों का महत्व लखनऊ में हुई अलीगंज की भयावह अग्नि त्रासदी के बाद और बढ़ जाता है. उस घटना ने उन इमारतों में अग्नि सुरक्षा की अनदेखी के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया था जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं.
CMS लखनऊ में 20 से अधिक कैंपस संचालित करने और हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने वाला संस्थान है. CMS की ओर से अपनी वेबसाइट और सार्वजनिक सामग्री में कैंपसों में सुरक्षा एवं संरक्षा समितियों, पर्यावरण स्वास्थ्य एवं सुरक्षा अधिकारी, अग्नि निकासी अभ्यास और अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है.
यही कारण है कि CMS द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित सुरक्षा मानकों और उर्वशी शर्मा की शिकायतों से सामने आई कथित कमियों के बीच का अंतर अब गंभीर सार्वजनिक सवाल बन गया है.
सुरक्षा के सवाल पर पीछे हटने को तैयार नहीं उर्वशी शर्मा
उर्वशी शर्मा लंबे समय से यह सवाल उठाती रही हैं कि क्या किसी शैक्षणिक संस्थान की प्रतिष्ठा, विस्तार और व्यावसायिक हित बच्चों की शारीरिक सुरक्षा से ऊपर हो सकते हैं.
उनका अभियान केवल सोशल मीडिया या सार्वजनिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने IGRS के माध्यम से संबंधित सरकारी अधिकारियों के समक्ष शिकायतें दर्ज कराकर जांच और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की.
उनका तर्क स्पष्ट है. विद्यालय केवल शिक्षा देने का स्थान नहीं है. यह वह स्थान है जहां हजारों बच्चे प्रतिदिन कई घंटे बिताते हैं. इसलिए अग्नि सुरक्षा अनुपालन को केवल एक औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता.
13 CMS शाखाओं और हेड ऑफिस से संबंधित निष्कर्षों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. यदि अनेक परिसरों में अनिवार्य सुरक्षा मानकों की कमियां थीं, तो इन कमियों को समय रहते स्थायी रूप से दूर क्यों नहीं किया गया.
कैम्ब्रिज कैंपस विशेष जांच के घेरे में
विवाद का सबसे गंभीर पहलू CMS के कैम्ब्रिज इंटरनेशनल एजुकेशन कार्यक्रम से जुड़े परिसरों को लेकर सामने आया है.
CMS के अपने विवरण के अनुसार लखनऊ में पांच कैम्ब्रिज कैंपस हैं. इनमें अलीगंज कैंपस 1, गोल्फ सिटी कैंपस, गोमती नगर एक्सटेंशन, गोमती नगर कैंपस 1 और राजाजीपुरम कैंपस 1 शामिल हैं.
निरीक्षण रिपोर्टों के अनुसार इन पांच में से चार कैम्ब्रिज कैंपसों में अनिवार्य अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन में गंभीर कमियां पाई गई हैं.
उर्वशी शर्मा का कहना है कि यह अत्यंत गंभीर विषय है क्योंकि कैम्ब्रिज शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के रूप में प्रस्तुत किया जाता है. ऐसे में अधिक शुल्क देने वाले अभिभावकों को यह अपेक्षा करने का पूरा अधिकार है कि जिन भवनों में उनके बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, वहां सभी अनिवार्य अग्नि और भवन सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन हो.
मामला केवल अग्निशमन यंत्रों या मॉक ड्रिल तक सीमित नहीं है. वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या आग से बचाव, निकासी, प्रवेश और निकास मार्ग, अग्निशमन व्यवस्था, भवन उपयोग, क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा और वैध अनुमोदनों से संबंधित सभी अनिवार्य मानकों का लगातार पालन किया जा रहा है.
पैसा बनाम सुरक्षा का सवाल
शर्मा ने CMS प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने CMS नेतृत्व से जुड़ी प्रमुख हस्तियों, भारती गांधी और गीता गांधी किंगडन पर आरोप लगाया है कि छात्रों की सुरक्षा के हितों की तुलना में निजी लाभ और संस्थागत विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है.
शर्मा द्वारा उठाया गया मूल सार्वजनिक हित का यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है.
जब अभिभावक विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के लिए भारी शुल्क का भुगतान करते हैं, तो वे केवल शिक्षा नहीं खरीद रहे होते. वे अपने बच्चों को प्रतिदिन कई घंटों के लिए संस्थान की जिम्मेदारी में सौंप रहे होते हैं.
इसलिए प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल परीक्षा परिणाम, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम, शानदार आधारभूत संरचना और संस्थागत प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं हो सकती.
किसी भी शैक्षणिक उपलब्धि की कीमत किसी बच्चे की जान नहीं हो सकती.
एक गंभीर विरोधाभास
CMS ने शिक्षा, वैश्विक नागरिकता और छात्र कल्याण के क्षेत्र में एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है.
संस्थान अपनी सार्वजनिक सामग्री में बच्चों के बेहतर भविष्य और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा की बात करता है. CMS को यूनेस्को से जुड़ी उपलब्धियों और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड जैसी प्रतिष्ठित पहचान पर भी गर्व है.
CMS की प्रकाशित सामग्री में कैंपसों में सुरक्षा समितियों और पर्यावरण स्वास्थ्य एवं सुरक्षा अधिकारी द्वारा निरीक्षण तथा सुरक्षा मानकों के अनुपालन की निगरानी का उल्लेख किया गया है.
ऐसे में जब अनेक परिसरों में गंभीर अग्नि सुरक्षा कमियां पाई जाती हैं तो यह सीधे जवाबदेही का प्रश्न पैदा करता है.
क्योंकि निरीक्षण रिपोर्टों में सामने आई कमियां वास्तविक हैं इसीलिए उन्हें बिना किसी देरी के दूर किया जाना चाहिए. हजारों बच्चों की सुरक्षा के मामले में कोई बीच का रास्ता स्वीकार नहीं किया जा सकता.
उर्वशी शर्मा का कहना है कि उनके लिए सबसे गंभीर चिंताओं में से एक यह भी है कि CMS का वह कैंपस और हेड ऑफिस भी अग्नि सुरक्षा मानकों में विफल पाए गए हैं जो CMS के संस्थापक स्वर्गीय जगदीश गांधी के नाम पर स्थित सड़क पर हैं.
राजनीतिक नेतृत्व से भी सवाल
यह विवाद केवल CMS तक सीमित नहीं है.
CMS लखनऊ के सबसे चर्चित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और उसके विभिन्न कार्यक्रमों में प्रमुख सार्वजनिक हस्तियां, राजनीतिक नेता और प्रभावशाली लोग शामिल होते रहे हैं.
शर्मा का कहना है कि किसी संस्थान के कार्यक्रमों में राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति को उसके नियामकीय अनुपालन की स्वीकृति नहीं माना जा सकता.
उनका सवाल है कि क्या प्रतिष्ठित संस्थानों के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी है कि जब बच्चों की सुरक्षा से संबंधित गंभीर शिकायतें सरकारी अधिकारियों के समक्ष रखी जाएं तो वे इस विषय पर ध्यान दें.
यह मामला किसी एक राजनीतिक दल का नहीं है.
सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सभी के लिए सार्वजनिक चिंता का विषय होनी चाहिए.
नियामक एजेंसियां कहां थीं
सबसे असहज सवाल सरकारी अधिकारियों की भूमिका को लेकर उठता है.
क्योंकि विभिन्न CMS परिसरों के संबंध में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए गए हैं तो जवाबदेही केवल स्कूल प्रबंधन तक सीमित नहीं रह सकती.
अग्नि सुरक्षा, भवन स्वीकृति, उपयोग की अनुमति और शैक्षणिक मान्यता से संबंधित मामलों में विभिन्न सरकारी विभागों और वैधानिक संस्थाओं की भूमिका होती है.
सवाल यह है कि यदि राज्य की राजधानी में इतने बड़े स्तर पर संचालित संस्थान के अनेक परिसरों में लंबे समय से गंभीर सुरक्षा कमियां मौजूद थीं, तो नियामक एजेंसियों की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ी.
नियामक संस्थाओं की जिम्मेदारी केवल किसी त्रासदी के बाद कार्रवाई करना नहीं है.
उनकी पहली जिम्मेदारी त्रासदी को रोकना है.
अलीगंज की त्रासदी पहले ही यह दिखा चुकी है कि सुरक्षा जोखिमों की अनदेखी, उपेक्षा या अपर्याप्त कार्रवाई कितनी भयावह साबित हो सकती है.
उर्वशी शर्मा का अभियान क्यों महत्वपूर्ण है
उर्वशी शर्मा के अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने अत्यधिक सार्वजनिक प्रभाव और प्रतिष्ठा वाले एक बड़े शैक्षणिक संस्थान के खिलाफ सवाल उठाने का जोखिम लिया है.
किसी बड़े शैक्षणिक संगठन के खिलाफ आवाज उठाना किसी व्यक्तिगत कार्यकर्ता के लिए आसान नहीं होता. ऐसी कार्रवाई संस्थागत विरोध, आलोचना और सामाजिक दबाव को जन्म दे सकती है.
इसके बावजूद शर्मा ने औपचारिक सरकारी शिकायत व्यवस्था के माध्यम से मामले को लगातार उठाया है.
उनका तरीका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने बहस को केवल आरोपों तक सीमित नहीं रखा बल्कि सरकारी जांच और अभिलेखों के आधार पर वास्तविक अनुपालन स्थिति सामने लाने की मांग की है.
वह अभिभावकों से भी केवल चिंता व्यक्त करने के बजाय अपने बच्चों की सुरक्षा के संबंध में सक्रिय होने की अपील कर रही हैं.
उनका संदेश स्पष्ट है.
किसी संस्थान की प्रतिष्ठा पर आंख मूंदकर भरोसा न करें.
यह न मानें कि प्रसिद्ध विद्यालय का भवन अपने आप पूरी तरह सुरक्षित और नियमों के अनुरूप होगा.
अभिभावकों को यह सुनिश्चित करने की मांग करनी चाहिए कि जिस कैंपस में उनका बच्चा पढ़ता है वहां सभी अनिवार्य अग्नि और भवन सुरक्षा मानकों का पालन हो तथा संबंधित अनुमोदन वास्तविक भवन और उसके वर्तमान उपयोग के लिए वैध हों.
सबसे बड़ा सबक
उर्वशी शर्मा द्वारा उठाया गया मुद्दा अंततः केवल CMS तक सीमित नहीं है.
यह इस मूल प्रश्न से जुड़ा है कि क्या भारत के शैक्षणिक संस्थानों को विशाल प्रतिष्ठा और ब्रांड बनाने की अनुमति दी जा सकती है जबकि सुरक्षा अनुपालन केवल कागजी कार्रवाई और समय समय पर होने वाले निरीक्षण तक सीमित रह जाए.
किसी विद्यालय में विश्वस्तरीय शिक्षक, शानदार परीक्षा परिणाम, अंतरराष्ट्रीय संबद्धता और प्रतिष्ठित पुरस्कार हो सकते हैं लेकिन किसी भी विद्यालय की सबसे बुनियादी कसौटी यही है कि सुबह परिसर में प्रवेश करने वाला बच्चा शाम को सुरक्षित अपने घर लौटे.
हर शैक्षणिक संस्थान का मूल्यांकन इसी कसौटी पर होना चाहिए.
उर्वशी शर्मा के लिए यह अभियान केवल CMS के खिलाफ नहीं है.
यह उस व्यवस्था को जवाब देने के लिए मजबूर करने का प्रयास है कि अगली त्रासदी होने से पहले संभावित खतरे को क्यों नहीं रोका जाता.
यदि किसी शिकायत में बच्चों के जीवन के लिए संभावित खतरे की ओर गंभीरता से संकेत किया जाता है तो क्या किसी कार्यकर्ता को इसलिए चुप रह जाना चाहिए क्योंकि संबंधित संस्थान शक्तिशाली और प्रतिष्ठित है.
उर्वशी शर्मा ने चुप रहने के बजाय दूसरा रास्ता चुना है.
अब जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों की है.
और अंततः CMS प्रबंधन की भी.
जनता को यह जानने का अधिकार है कि प्रत्येक CMS कैंपस वास्तव में पूरी तरह सुरक्षित और नियमों के अनुरूप है या नहीं. केवल यह तथ्य पर्याप्त नहीं है कि संस्थान की प्रतिष्ठा बड़ी है.














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