Wednesday, April 15, 2026

टुंडे कबाबी का काला सच: ‘विश्व प्रसिद्ध’ के नाम पर ग्राहकों की सेहत,जानमाल और भरोसे से खिलवाड़.

 टुंडे कबाबी का काला सच: ‘विश्व प्रसिद्ध’ के नाम पर ग्राहकों की सेहत,जानमाल और भरोसे से खिलवाड़.

 

RTI एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा की समाजसेवा ने खोलीं ब्रांड की परतें | LDA, FSDA और फायर विभाग की जांच में अवैध निर्माण, अनेकों खाद्य खामियां और अग्निशमन के साथ-साथ ढांचागत सुरक्षा में गंभीर लापरवाही उजागर | अब डायरेक्टर्स तौसीफ़ जहाँ, मोहम्मद सलमान और मोहम्मद उस्मान की भूमिका पर बड़े सवाल.

 

नोट – सभी विभागों की जांच आख्यायें वेबलिंक https://upcpri.blogspot.com/2026/04/blog-post_14.html को क्लिक करके download की जा सकती हैं l

 

 लखनऊ | 15 अप्रैल 2026.......................

उत्तर प्रदेश की राजधानी में खुद को “विश्व प्रसिद्ध” बताने वाले टुंडे कबाबी ब्रांड पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजाजीपुरम निवासी समाजसेविका एवं RTI एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा द्वारा लगातार की गई शिकायतों और फॉलो-अप के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश और मुख्य अग्निशमन अधिकारी लखनऊ की जांचों में चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं।

 

जांचों से स्पष्ट है कि मामला किसी एक आउटलेट तक सीमित नहीं, बल्कि अमीनाबाद, अलीगंज और अन्य क्षेत्रों में संचालित कई इकाइयों में नियमों की व्यवस्थित अनदेखी का संकेत देता है।

 

एक नागरिक की सतत लड़ाई जिसने खोली बड़ी सच्चाई

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत उर्वशी शर्मा द्वारा की गई शिकायतों से हुई, जिन्होंने न केवल विभिन्न विभागों में शिकायत दर्ज कराईं बल्कि निरंतर फॉलो-अप कर प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर किया।

उनकी पहल पर:

  • LDA ने अवैध निर्माण की जांच कर विधिक कार्रवाई शुरू की
  • अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा खामियों पर नोटिस जारी किए
  • FSDA ने खाद्य सुरक्षा निरीक्षण कर “Improvement Notice” जारी किये

यह मामला दिखाता है कि एक सजग नागरिक की दृढ़ता कैसे बड़े ब्रांड्स की भी जवाबदेही तय कर सकती है।

 

LDA रिपोर्ट: अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी

लखनऊ विकास प्राधिकरण की जांच में पाया गया कि:

  • बिना स्वीकृति निर्माण कार्य किए गए
  • भू-उपयोग नियमों का उल्लंघन हुआ
  • कॉम्प्लेक्स में व्यावसायिक गतिविधियां नियमानुसार नहीं थीं

प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 के तहत कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

 

फायर विभाग: सुरक्षा के नाम पर गंभीर चूक – ग्राहकों की जानमाल को खतरा

मुख्य अग्निशमन अधिकारी लखनऊ की रिपोर्ट में सामने आया:

  • अग्निशमन उपकरणों का अभाव
  • अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं
  • नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश

स्थिति ऐसी पाई गई कि किसी भी आपातकाल में बड़ा हादसा हो सकता है ।

 

FSDA रिपोर्ट: अनेकों गंभीर खामियां, सेहत पर सीधा खतरा

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश द्वारा जारी “Improvement Notice” में अनेकों गंभीर अनियमितताएं दर्ज की गईं:

  • बिना जैविक और रासायनिक जांच वाले पानी  से भोजन निर्माण
  • लाइसेंस किसी का किन्तु मौके पर कोई और कर रहा व्यापार
  • गन्दगी से भरा फ्रिज
  • खुलेआम आती धूल, मक्खी,मच्छर और कीड़े मकोड़े
  • गंदे बर्तनों में भोजन निर्माण
  • खाना पकाने के बाद उसी तेल का बार-बार प्रयोग
  • किचन में गंदगी, जाले और टूट-फूट
  • खाद्य हैंडलिंग एरिया में स्वच्छता का अभाव
  • खराब ड्रेनेज और पानी निकासी व्यवस्था
  • कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म/सुरक्षा उपकरण का अभाव
  • खाद्य सामग्री खुले और अस्वच्छ तरीके से रखी गई
  • खाद्य पदार्थ ढके बिना रखे गए
  • फर्श पर तेल, गंदगी और फिसलन
  • कीट/मक्खियों की मौजूदगी
  • खाद्य पदार्थों पर निर्माण/उपयोग तिथि का अभाव
  • कच्चे और पके खाद्य पदार्थों का मिश्रण
  • बर्तनों की सफाई में लापरवाही
  • कचरा प्रबंधन की खराब व्यवस्था
  • पेस्ट कंट्रोल का अभाव
  • कच्चे माल के स्रोत/बिल का अभाव
  • कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र नहीं
  • अस्वच्छ तरीकों से भोजन निर्माण
  • सामग्री/मसालों का परीक्षण नहीं
  • गुणवत्ता नियंत्रण हेतु वैज्ञानिक व्यवस्था का अभाव

ये सभी उल्लंघन खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत गंभीर माने जाते हैं। विभाग ने 15 दिनों में सुधार के निर्देश दिए हैं।

 

 

डायरेक्टर्स पर सवाल: जवाबदेही से बचाव या प्रबंधन की विफलता?

टुंडे कबाबी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों तौसीफ़ जहाँ, मोहम्मद सलमान और मोहम्मद उस्मान की भूमिका अब गंभीर सवालों के घेरे में है क्योंकि जब:

  • एक ही ब्रांड के कई प्रतिष्ठानों में समान खामियां मिलें
  • खाद्य, फायर और निर्माण—तीनों क्षेत्रों में उल्लंघन सामने आयें

तो यह केवल स्थानीय स्तर की गलती नहीं, बल्कि प्रबंधन स्तर की बड़ी विफलता मानी जाती हैं ।

 

 

उठते बड़े सवाल:

  • क्या निदेशकों को इन अनियमितताओं की जानकारी नहीं थी?
  • क्या ब्रांड की छवि के भरोसे नियमों की अनदेखी की गई?
  • क्या उपभोक्ताओं की सेहत, सुरक्षा और भरोसे से जानबूझकर खिलवाड़ किया गया?

 

 

विश्व प्रसिद्ध” ब्रांड या भरोसे के साथ धोखा ?

जो ब्रांड अपनी पहचान स्वाद और परंपरा के नाम पर बनाता है, वहां इस स्तर की लापरवाही केवल चूक नहीं, बल्कि उपभोक्ता विश्वास के साथ सीधा धोखा है।

 

 

निष्कर्ष: अब कार्रवाई नहीं, जवाबदेही तय करने का समय

यह पूरा मामला केवल एक रेस्टोरेंट या ब्रांड तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों का मुद्दा है।

उर्वशी शर्मा की जागरूकता ने जिस तरह से एक बड़े ब्रांड की परतें खोली हैं, वह प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है।

अब देखना यह है कि:

  • क्या संबंधित प्रबंधन इन खामियों को सुधारता है
  • या फिर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करता है

क्योंकि सवाल अब सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सेहत, सुरक्षा और भरोसे का है।







 

 

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