Thursday, May 2, 2024

बच्चों के साथ धोखाधड़ी कर उनका भविष्य जानबूझकर बर्बाद कर रहा है यूपी का समाज कल्याण विभाग : मोदी-योगी की युवा रोजगार गारंटी योजना के मुंह पर कालिख पोत रहे हैं विभाग के भ्रष्ट अधिकारी.

 लखनऊ / शुक्रवार, 3 मई 2024 ..............

जहाँ एक तरफ देश के प्रधानमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री देश और प्रदेश के छात्रों गौर युवाओं को रोजगार की गारंटी देने की बात जोर-शोर से कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ योगी की नाक के नीचे सचिवालय और निदेशालय में बैठे समाज कल्याण के भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी निजी स्वार्थसिद्धि के लिए प्रदेश के नौनिहालों के साथ धोखाधड़ी करने और उनके भविष्य को जानबूझकर बर्बाद करने का गैरकानूनी काम सरकारी संगठित गैंग बनाकर उस समाज कल्याण विभाग में कर रहे जिस विभाग का मुख्य जिम्मा ही समाज का कल्याण करने का है.

 मामला समाज कल्याण विभाग की कुल 253 अनुदान प्राप्त प्राविधिक एवं औधोगिक संस्थाओं तथा मान्यता प्राप्त प्राविधिक एवं औधोगिक संस्थाओं का है जिनके मार्फत लाखों छात्रों को निरंतर धोखे में रखकर उनके भविष्य को अंधे कुँए में धकेला जा रहा है.

 लम्बे समय से इस मुद्दे को उठा रहीं राजधानी के राजाजीपुरम इलाके की निवासिनी समाजसेविका और पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के आरटीआई प्रकोष्ठ की प्रदेश उप प्रभारी रह चुकीं उर्वशी शर्मा बताती है कि उनके प्रयासों के बाद समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेश संख्या 1624/26-2-2021 लखनऊ दिनांक 12 अक्टूबर 2021 के माध्यम से विभाग की अनुदान प्राप्त प्राविधिक एवं औधोगिक संस्थाओं तथा मान्यता प्राप्त प्राविधिक एवं औधोगिक संस्थाओं द्वारा 30-06-2022 तक एन.सी.वी.टी. से मान्यता प्राप्त न कर पाने की स्थिति में विभाग द्वारा प्रदत्त मान्यता को शून्य मान लिए जाने के आदेश पारित किये गए थे और शासन के इस आदेश के अनुक्रम में निदेशालय समाज कल्याण उत्तर प्रदेश के तत्कालीन निदेशक  राकेश कुमार ने अपने हस्ताक्षरों से कार्यालय ज्ञाप संख्या – सी – 1373 / सoo / अनुo /औoप्राoशिoसंo / 2021-22 लखनऊ दिनांक 19 जनवरी 2022 जारी करके ऊपर वर्णित शासनादेश  की शर्तों को पूरा नहीं करने वाली समाज कल्याण विभाग की मान्यता प्राप्त / अनुदानित संस्थाओं की मान्यता को दिनांक 30-06-2022 के उपरांत शून्य मान लिए जाने के आदेश पारित किये थे.

 उर्वशी बताती हैं कि शासन और निदेशालय के इन कार्यालय ज्ञापों में ही यह स्पष्टतया अंकित है कि NCVT से मान्यता प्राप्त नहीं होने के कारण इन संस्थानों से प्राप्त ITI प्रमाणपत्र केन्द्रीय एवं प्रदेशीय सरकारी सेवाओं में सेवायोजन के लिए मान्य नहीं होने के कारण इन संस्थाओं से प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत छात्र स्वयं को कुंठित और असहाय पाते हैं तथा ये संस्थाएं छात्रों हेतु लाभकारी अथवा उपयोगी सिद्ध नहीं हो रही हैं और इन संस्थाओं द्वारा बच्चों का भविष्य अंधकारमय रखकर उनके साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.

 उर्वशी कहती हैं कि छात्रों के भविष्य की दृष्टि से ये दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि इसके पश्चात भी शासन और निदेशालय के कतिपय अधिकारियों  और कर्मचारियों द्वारा शासन तथा निदेशालय के उपरोक्त कार्यालय ज्ञापों के खिलाफ जाकर छात्रों के साथ धोखा-धड़ी करके अवैध रूप से चल रही  गैर एन.सी.वी.टी. मान्यता प्राप्त संस्थाओं की मान्यताओं को दिनांक 30-06-2022 से आगे एक वर्ष ( दिनांक 30-06-2023 ) तक विस्तारित करके के गैरकानूनी आदेश जारी किये गए और यही नहीं, शासन तथा निदेशालय के इन आदेशों के पश्चात इन संस्थाओं में नए प्रवेशों पर पूर्ण रोक लगाईं जानी चाहिए थी किन्तु ऐसा नहीं किया गया है और  शासन और निदेशालय के कतिपय अधिकारियों  और कर्मचारियों की मिलीभगत से इन गैर एन.सी.वी.टी. मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा छात्रों के साथ धोखा-धड़ी करके अवैध रूप से नए प्रवेश निरंतर जारी हैं और आर्थिक लाभ के दुरुद्देश्य से जान बूझकर देश के नौनिहालों के भविष्य को अंधे कुँए में धकेला जा रहा है.

 उर्वशी बताती हैं कि उनको कतिपय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि शासन और निदेशालय के कतिपय अधिकारियों  और कर्मचारियों द्वारा अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति हेतु इन गैर एन.सी.वी.टी. मान्यता प्राप्त संस्थाओं से करोड़ों की घूस खाकर इन संस्थाओं की मान्यता को पुनः विस्तारित करके के गैरकानूनी आदेश शासन और निदेशालय स्तर से निकट भविष्य में पुनः जारी कराये जाने की साजिश की जा रही है.

 उर्वशी बताती है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त होकर मोदी-योगी की छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास करने के इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने  भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमन्त्री, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश,यूपी के राज्यपाल,मुख्यमंत्री, समाज कल्याण मंत्री, मुख्य सचिव समेत दर्जनों आला  अधिकारियों को शिकायत भेजकर मामले की गहनता से जांच कराकर दोषियों को चिन्हित कराकर उनके विरुद्ध प्रशासनिक और विधिक कार्यवाही कराने के साथ साथ संस्थाओं द्वारा नए प्रवेश नहीं लिए जाने , संस्थाओं की मान्यताएं निरस्त करने और गैर एन.सी.वी.टी. मान्यता प्राप्त संस्थाओं के परिचालन से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर उनके साथ निरंतर हो रही धोखा-धड़ी को रोकने के लिए संस्थाओं की मान्यताओं को किसी  भी दशा में विस्तारित नहीं होने देने की मांग की है.

 उर्वशी ने बताया कि वे शीघ्र ही सूबे के मुख्यमंत्री से मिलकर उनको इस मामले के प्रमाण सौंपकर समाज कल्याण  की देश के नौनिहालों के साथ निरंतर की जा रही साजिश से व्यक्तिगत रूप से भी अवगत कराएंगी.

 











 

 


Saturday, March 16, 2024

पद सँभालते ही यूपी के नए मुख्य सूचना आयुक्त डॉ. राजकुमार विश्वकर्मा ने किया ऐसा काम कि सूबे के आरटीआई एक्टिविस्ट हो गए खुश.

 










 

 

यूपी : पद संभालने के दिन ही सूचना आयोग के कार्यों का दैनिक टाईमटेबल बना आयुक्तों को कार्य आबंटित कर सीआईसी डॉ. राजकुमार विश्वकर्मा ने जीता सूबे के आरटीआई कार्यकर्ताओं का दिल.

 

लखनऊ / शनिवार,16 मार्च 2024 .........................

“होनहार बिरवान के होत चीकने पात” और “पूत के पैर पालने में ही दिख जाते हैं” जैसी लोकोक्तियाँ आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के नए मुख्य सूचना आयुक्त ( सीआईसी ) डॉ. राजकुमार विश्वकर्मा की इस नई पारी के पहले दिन के कार्यों के सन्दर्भ में सकारात्मक रूप में पढ़ी जा सकती हैं. एक आईपीएस के रूप में सेवा की सफल पारी पूरी करने के बाद यूपी के सीआईसी बने विश्वकर्मा के बीती 13 मार्च को राजभवन में शपथग्रहण के बाद आयोग में कार्यभार ग्रहण कर उसी दिन दो आदेश जारी करके न केवल सूचना आयोग के कार्यों का दैनिक टाईमटेबल बनाने का लम्बे समय से लंबित ऐतिहासिक कार्य किया बल्कि तत्परतापूर्वक सभी आयुक्तों को कार्य आबंटित कर आयोग की कार्यप्रणाली में ओप्टिमम टाइम मैनेजमेंट का जनहितकारी स्पष्ट सन्देश भी दे दिया है.

 

राजधानी के राजाजीपुरम क्षेत्र निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट और पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के आरटीआई प्रकोष्ठ की प्रदेश उप प्रभारी रह चुकीं उर्वशी शर्मा ने बातचीत में बताया कि डॉ. राजकुमार विश्वकर्मा के इन त्वरित और लोकहितकारी आदेशों को देखकर सूबे के तमाम आरटीआई एक्टिविस्टों में यह उम्मीद बंधी है कि देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस” की नीतियों को अमल में लाने के लिए सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की जो प्रक्रिया सेवानिवृत्त सीआईसी भवेश कुमार के पूरे कार्यकाल में निरंतर चली थी वह डॉ. राजकुमार विश्वकर्मा के कार्यकाल में भी उत्तरोत्तर चलती रहेगी.

 

बकौल उर्वशी, आरटीआई कानून की धारा 15 की उपधारा 4 द्वारा सूचना आयोग के कार्यों के साधारण अधीक्षण,निदेशन और प्रबंध के अधिकार राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त में स्वतंत्र रूप से निहित किये गए हैं और इन मामलों में अन्य सूचना आयुक्तों की भूमिका मुख्य सूचना आयुक्त के सहायक मात्र की है.

 

इतिहास में झांकते हुए उर्वशी बताती हैं कि उनकी मांगों पर पूर्व के सीआईसी द्वारा आयोग में विशाखा समिति का गठन किया गया, सूचना आवेदकों की सुरक्षा के लिए आयोग स्तर से पुलिस महकमे को निर्देश जारी किये गए, अपीलों और शिकायतों की ऑनलाइन व्यवस्था आरम्भ हुई और सूचना आयोग की कार्यप्रणाली को आमजन के लिए पारदर्शी और सुकर बनाने के लिए आरटीआई कानून की धारा 15 की उपधारा 4  के तहत अनगिनत आदेश जारी हुए.

 

 

उर्वशी ने बताया कि सूचना आवेदकों की मुख्य समस्या सूचना आयुक्तों की आयोग में उपस्थिति के समय को लेकर आयुक्तों का मनमाना व्यवहार था जिसके सम्बन्ध उनके द्वारा आयोग के कार्यों का दैनिक टाइम टेबल निर्धारित करने की मांग पूर्व में उठाई गई थी. सूबे के आरटीआई कार्यकर्ताओं की ओर से सीआईसी विश्वकर्मा को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उर्वशी ने बताया कि सीआईसी विश्वकर्मा के आदेश पत्रांक 474 के अमल में आने से सूचना आयुक्तों की आयोग में उपस्थिति के समय की निरंकुशता की समस्या का समाधान हो गया है.

 

 

आयोग के आदेश पत्रांक 475 में सीआईसी विश्वकर्मा के द्वारा सूचना आयुक्तों को जो कार्य आबंटन किया गया है उसके अनुसार सुधीर कुमार सिंह को बरेली और चित्रकूट मंडल,गिरजेश कुमार चौधरी को लखनऊ मंडल, डा. दिलीप कुमार अग्निहोत्री को कानपूर और बस्ती मंडल,पदुम नारायण द्विवेदी को वाराणसी और सहारनपुर मंडल, स्वतंत्र प्रकाश को फैजाबाद और देवीपाटन मंडल, मोहम्मद नदीम को इलाहाबाद और मिर्ज़ापुर मंडल,राजेन्द्र सिंह को गोरखपुर और झाँसी मंडल,शकुंतला गौतम को मुरादाबाद और आजमगढ़ मंडल,राकेश कुमार को मेरठ मंडल तथा वीरेन्द्र प्रताप सिंह को आगरा और अलीगढ मंडल का प्रभार दिया गया है.

 


Wednesday, December 27, 2023

राजकोष पर बोझ बन चुकी मानसिक रूप से नितांत अक्षम (समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक लखनऊ की प्रवक्ता अंग्रेजी ) श्रीमती श्रद्धा सक्सेना का मेडिकल बोर्ड से मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण और शैक्षणिक कमेटी बनाकर बौद्धिक परीक्षण करा अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सेवा से बाहर करने की मांग विषयक l

 



सेवा में,                                                                                                                                 

1.       प्रमुख सचिव, समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन,लखनऊ l

2.       प्रमुख सचिव, प्राविधिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन,लखनऊ l

3.       विशेष सचिव, समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन,लखनऊ l

4.       संयुक्त सचिव, समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन,लखनऊ l

5.       अनु सचिव, समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन,लखनऊ l

6.       निदेशक, उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निदेशालय,प्राग नारायण रोड,लखनऊ l

7.       निदेशक,प्राविधिक शिक्षा निदेशालय,विकास नगर,कानपुर 208024

8.       संयुक्त निदेशक, उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निदेशालय,प्राग नारायण रोड,लखनऊ l

9.       उप निदेशक, उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निदेशालय,प्राग नारायण रोड,लखनऊ l

10.   उपनिदेशक, समाज कल्याण लखनऊ मंडल ,टिकरा हाउस,कैंट रोड,लखनऊ l

11.   जिला समाज कल्याण अधिकारी जनपद लखनऊ,लखनऊ,उत्तर प्रदेश l

12.   सचिवउत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद  , लखनऊ  l

13.   प्रधानाचार्य,राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक,मोहान रोड,लखनऊ l

 

विषय : राजकोष पर बोझ बन चुकी मानसिक रूप से नितांत अक्षम (समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक लखनऊ की प्रवक्ता अंग्रेजी ) श्रीमती श्रद्धा सक्सेना का मेडिकल बोर्ड से मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण और शैक्षणिक कमेटी बनाकर बौद्धिक परीक्षण करा अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सेवा से बाहर करने की मांग विषयक l

 

महोदय,

राजकोष पर बोझ बन चुकी मानसिक रूप से नितांत अक्षम (समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक लखनऊ की प्रवक्ता अंग्रेजी ) श्रीमती श्रद्धा सक्सेना का मेडिकल बोर्ड से मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण और शैक्षणिक कमेटी बनाकर बौद्धिक परीक्षण कराकर  परीक्षणों की रिपोर्टों के आधार पर श्रीमती श्रद्धा सक्सेना को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सेवा से बाहर करने की मांग के सम्बन्ध में पूर्व में सप्रमाण की गई दर्जनों शिकायतों के सन्दर्भ से पुनः अवगत कराना है कि समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलिटेक्निक लखनऊ में कार्यरत कार्मिक श्रीमती श्रद्धा सक्सेना इस संस्था में अंग्रेजी विषय की प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं l

 

कृपया उपरोक्त श्रीमती श्रद्धा द्वारा दिनांक 26-12-2023 को संस्था के प्रधानाचार्य को संबोधित हस्तलिखित प्रार्थना पत्र ( 2 प्रतियां  संलग्न है ) का सम्यक संज्ञान लेने का कष्ट करें l इस प्रार्थना पत्र के अवलोकन से महोदय को स्पष्ट हो जायेगा कि उपरोक्त श्रद्धा साधारण सी यह बात भी समझने में अक्षम है कि साधारण गणितीय गिनती गिनने पर दिनांक 27-12-2023 ( बुधवार ) से 30-12-2023 ( माह के पांचवें शनिवार ) तक का अवकाश लेने पर 4 दिन का अवकाश बनता है न कि 3 दिन का, जो कि उपरोक्त श्रद्धा ने अपने प्रार्थना पत्र में लिखा है l श्रद्धा सक्सेना के संलग्न प्रार्थना पत्र से स्पष्ट है कि श्रद्धा पूर्णतया बुद्धिहीन और महामूर्ख हो चुकी है और अब वह 1 से 4 तक की गिनती भी नहीं गिन सकती है और किसी प्रकार से विभाग के उच्चाधिकारियों को साधकर सेवा में बनी हुई है ( इस तथ्य की भी जांच आवश्यक है ) जो नितांत अनुचित है और इस महिला कार्मिक की सेवाएं इसकी पूर्ण बुद्धिहीनता और महा मूर्खता के चलते समाप्त किया जाना न्यायहित में आवश्यक है l

 

मानसिक रूप से नितांत अक्षम हो चुकी श्रीमती श्रद्धा द्वारा छात्रों को जिस प्रकार का ज्ञान दिया जा रहा होगा उसकी तो सिर्फ कल्पना मात्र ही की जा सकती है l यदि देश के नौनिहाल श्रद्धा जैसे मानसिक रूप से अक्षम  अध्यापक से शिक्षा ग्रहण करेंगे तो उनका भविष्य संवरने के स्थान पर बिगड़ना अवश्संभावी है और ऐसा होने देना न तो  देश हित में है, न समाज हित में है और न ही लोक हित तथा सरकार हित में है l

 

इस पत्र के अवलोकन से महोदय को स्पष्ट हो जाएगा कि उपरोक्त श्रीमती श्रद्धा सक्सेना अब राजकोष पर गंभीर बोझ बन चुकी हैं और उनके शिक्षण से छात्रों को नुकसान ही हो रहा है अतः वृहद् लोकहित में महोदय से अनुरोध है कि कृपया संलग्न पत्र एवं इस सम्बन्ध में भेजे गए पूर्व के पत्रों का संज्ञान लेकर श्रीमती श्रद्धा सक्सेना का मेडिकल बोर्ड से मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण और शैक्षणिक कमेटी बनाकर बौद्धिक परीक्षण कराकर  परीक्षणों की रिपोर्टों के आधार पर श्रीमती श्रद्धा सक्सेना को राज्य सरकार के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के शासनादेशों और नियमों के तहत सरकारी सेवा से बाहर करने की कार्यवाही आरम्भ कर शीघ्रातिशीघ्र अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान की जाए और कृत कार्यवाही से मुझे अवगत कराया जाए l

 

दिनांक : 

                                                   

संलग्नक : उपरोक्तानुसार ( 2 पेज )

                  

प्रतिलिपि : आवश्यक कार्यवाही हेतु निम्नलिखित को प्रेषित :

1.       राष्ट्रपति , भारत सरकार , नई दिल्ली  l

2.       प्रधान मंत्री ,भारत सरकार , नई दिल्ली  l

3.       महामहिम मा० श्री राज्यपाल ,उत्तर प्रदेश शासन ,लखनऊ l   

4.       मा० मुख्य मंत्री ,उत्तर प्रदेश शासन ,लखनऊ l   

5.       मा० मंत्री-समाज कल्याण , उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ l   

6.       मुख्य सचिव,उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ l 

7.       मंडलायुक्त, लखनऊ मंडल,लखनऊ l

8.       जिलाधिकारी , जनपद  लखनऊ l  

 

 भवदीया,

 

 

( उर्वशी शर्मा )

समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री (Certified for R.T.I. by D.O.P.T.,G.O.I.)

पूर्व प्रदेश उप प्रभारी आरटीआई प्रकोष्ठ - भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश

102,नारायण टावर,ऍफ़ ब्लाक, राजाजीपुरम,होटल मंगलम के पास, लखनऊ -226017

मोबाइल 9455553838, 6391101234

ई मेल urvashisharmarti[AT]gmail[DOT]com